क्या आपने कभी सोचा है की हम जब अपने कंप्यूटर पर किसी भी वेब साईट को ब्राउज या सर्च करते है तो ये सर्च इनफार्मेशन हम तक किस तरह ट्रेवल करते हुए पहुंचती है?

आमतौर पर, जब भी हम इंटरनेट पर किसी वेबसाइट तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, तो हमें एक इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) की जरुरत होती है (ये ISP सभी जगह अलग-अलग होती है जैसे भारत की बात करे तो बीएसएनएल (BSNL), एमटीएनएल (MTNL), एयरटेल, आईडिया, वोडा, रिलायंस आदि)। जब भी हम किसी वेब साईट को ब्राउज करना चाहते है तो ये इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) हमारे द्वारा सर्च की गई वेबसाइट (या अन्य ऑनलाइन संसाधनों) पर हमें पुनर्निर्देशित (Redirect) करते हैं| हमारी सभी इंटरनेट खोज या ट्रैफ़िक इन  ISP के सर्वरों से होकर गुजरती हैं, जिसका अर्थ है कि वे हमारे द्वारा ऑनलाइन किए गए सभी गतिविधियों को देख और एक्सेस कर सकते हैं। वे हमारे द्वारा सर्च की गई ब्राउज़िंग इतिहास को विज्ञापनदाताओं, सरकारी एजेंसियों और अन्य किसी भी बिज़नस पार्टी को भी दे सकते हैं।

VPN क्या है? What is a VPN?

एक वीपीएन, या वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क, एक प्राइवेट नेटवर्क है जो इंटरनेट पर एक नोड से दुसरे नोड पर ट्रेवल करने वाले डेटा को एन्क्रिप्ट और ट्रांसमिट करता है। वीपीएन के उपयोग द्वारा इंटरनेट पर वेबसाइटों को प्राइवेट और सुरक्षित रूप से सर्फ कर सकते हैं और साथ ही प्रतिबंधित वेबसाइटों को एक्सेस कर सकते हैं और सेंसरशिप ब्लॉक को पार कर सकते हैं। वीपीएन डेस्कटॉप या लैपटॉप, आईफोन, आईपैड या एंड्रॉइड फोन पर भी सेट कर सकते हैं।

वीपीएन सेवा कैसे काम करती है? How does a VPN service work?

  1. VPN सर्विस प्रोवाइडर एक सर्वर है, जब VPN सर्विस को स्टार्ट करके इंटरनेट से कनेक्ट करते है तो यूज़र की डिवाइस सीधे तौर पर VPN सर्विस के सर्वर से कनेक्ट हो जाती है|
  2. इस समय VPN सर्वर, यूज़र को एक निश्चित सर्वर के Virtual IP Address की लिस्ट उपलब्ध करता है, इनमे से किसी भी IP Address से कनेक्ट करने पर VPN सर्विस, यूज़र की डिवाइस के IP Address को छुपा (hide) कर उसे एक वर्चुअल (Virtual) IP Address से कनेक्ट कर देता है|
  3. VPN कनेक्शन के एक्टिव होने के बाद या यूज़र की डिवाइस और उसके द्वारा कनेक्ट किए गए सर्वर के बीच इंटरनेट कनेक्शन को भी एन्क्रिप्ट (अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए डेटा को कोड में बदलने की प्रक्रिया) कर देता है|
  4. एक बार जब वास्तविक IP Address छिप (hide) हो जाता है तो यूजर द्वारा इन्टरनेट पर की जाने वाली ब्राउज़िंग को ट्रैक या ट्रेस करना असंभव हो जाता है और यूजर की पहचान गुप्त हो जाती है| 
  5. इस तरह VPN सर्विस, यूज़र के लिए एक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क बनाकर इंटरनेट पर वेबसाइटों को ब्राउज़िंग और गतिविधियों को प्राइवेट (Safe), सुरक्षित (Secure), और गुमनाम (anonymous) बनाने का एक एडवांस्ड तरीका है|

आइये इसको एक उदाहण से समझते है –

इन्टरनेट एक टू-वे ओपन रोड की तरह है जिस पर ड्राइव करने का कोई नियम नहीं है, मान लेते है आप इस रोड पर कार ड्राइव कर रहे हो,  ठीक इन्टरनेट ब्राउज करने की तरह, आप कभी भी किसी भी वेबसाइट को ब्राउज के लिए स्वतंत्र हो परन्तु इस रोड के ठीक उपर एक हेलीकाप्टर हर समय प्रत्येक वाहन पर निगरानी रख रहा  है ठीक उसी तरह जैसे एक ISP (इंटरनेट सेवा प्रदाता) और आपकी सरकार जो आपकी हर एक एक्टिविटी, और ब्राउज़िंग इतिहास पर नज़र रखती है और इनकी नजर से बचना बिलकुल भी संभव नहीं  हैं |

लेकिन सोचिये ,यदि रोड  के समान्तर एक सुरंग है। और आप उस  सुरंग में कर ड्राइव कर रहे है तो  ऊपर से निगरानी रखने वाला हेलीकॉप्टर आपको देख नहीं सकता है क्यूंकि आप तो सुरंग के अन्दर है | इन्टरनेट पर VPN भी उस सुरंग की तरह ही है जहाँ आप ऑनलाइन होते हुए भी सभी प्रकार की निगरानी से बच सकते है

“VPN का उपयोग करके इन्टरनेट पर की जाने वाली किसी भी एक्टिविटी को ट्रैक या ट्रेस करना असंभव होता है, यह ऑनलाइन डाटा को प्राइवेट (Safe), सुरक्षित (Secure), और गुमनाम (anonymous) बनाने के साथ ही साथ उसे एन्क्रिप्ट भी करता है |”

वीपीएन का उपयोग क्यों करना चाहिए ? Why should use a VPN ?

एक VPN न केवल एक एन्क्रिप्टेड इन्टरनेट कनेक्शन के साथ आपके ब्राउज़िंग एक्टिविटी को सुरक्षित करता है, बल्कि यह आपको दुनिया के किसी भी लोकेशन का फ्री इंटरनेट एक्सेस दे सकता है और इस तरह सिक्यूरिटी और जिओ-लोकेशन की अदला-बदली करके सिक्यूरिटी के कई आप्शनस का आसानी से उपयोग कर सकते है-

  • पब्लिक या ओपन वाई-फाई को सुरक्षित एक्सेस करने के लिए ,
  • क्षेत्रीय रूप से रिस्ट्रिक्टेड कंटेंट को स्ट्रीम करने के लिए,
  • ब्लॉक्ड वेबसाइटों को एक्सेस करने के लिए,
  • सेंसरशिप  कंटेंट से बचने के लिए,
  • ISP ट्रैकिंग और मोनिटरिंग से खुद को बचाने के लिए,

VPN का उपयोग सभी प्रकार की डिवाइस, मोबाइल फ़ोन और गेमिंग जोन के लिए भी किया जा सकता है|

एन्क्रिप्शन क्या है? What is Encryption?

एन्क्रिप्शन (encryption), किसी जानकारी (आपका डेटा) को और भी जटिल या रहस्यमय बनाने की एक प्रक्रिया है, इसमें संदेशों को अल्फावेटिकली, न्युमेरिकली, सांख्यिकी या कई अन्य पहेली के अव्यवस्थित रूप में विभाजित करके बनाया जाता है |

प्राचीन समय में संदेश वाहक  या गुप्तचर इसी तकनीक का उपयोग करकेसंदेशों का आदान-प्रदान किया करते थे, और आज भी यह उतनी ही कारगर और विश्वसनीय है| 

वर्तमान में कंप्यूटर पर फाइल्स और महत्वपूर्ण ऑफ-लाइन डाटा को सुरक्षित करने के साथ ही ऑन-लाइन डाटा और इनफार्मेशन की सुरक्षा के लिए भी एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग किया जाता है| एन्क्रिप्शन (encryption), को गुप्त कोड का एक रूप मान सकते हैं, जिसमें आपके डेटा को स्क्रैम्बल किया जाता है, जिसे एक साइफ़र (cypher) कहा जाता है, और फिर एक कुंजी (या तर्क) द्वारा संदेश को डिक्रिप्ट करके डाटा को फिर से उसके मूल रूप में प्राप्त किया जा सकता है ।

वीपीएन एन्क्रिप्शन कैसे काम करता है ? How does work VPN encryption?

ऑन-लाइन एक्टिविटी या ब्राउज़िंग के समय, VPN का उपयोग करके जब इंटरनेट से कनेक्ट करते हैं तो कनेक्शन एन्क्रिप्टेड हो जाता है, एन्क्रिप्ट होने से ISP या साइबर अपराधी आपके डेटा को ना तो पढ़ पाएंगे और ना ही उसे नुकसान पहुंचा पाएंगे|

AES (Highest encryption standard) उन्नत एन्क्रिप्शन मानक 256-बिट के रूप में जाना जाता है और इसका उपयोग सबसे अधिक अनुशंसित (recommended) VPN service provider द्वारा किया जाता है। 256-बिट का क्या मतलब है? यह एन्क्रिप्शन में उपयोग किए गए साइफ़र (cypher) का आकार है, यह जितना बड़ा (जटिल ) होता है, उसकी कुंजी (key ) का अनुमान लगाना उतना ही कठिन होता है। 256-बिट एन्क्रिप्शन की समानता ब्रह्मांड में सितारों की तुलना के सामान जानी जाती हैं। वास्तव में, 256-बिट एन्क्रिप्शन का यह स्तर इतना सुरक्षित है कि इसका उपयोग दुनिया भर के बैंकों, संवेदनशील संस्थानों और सरकारों द्वारा अपने डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

वीपीएन कौन से प्रोटोकॉल उपयोग करता है? Which protocols are used by VPN?

एक VPN  प्रोटोकॉल, एन्क्रिप्शन स्टैण्डर्ड और ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल का एक संयोजन (combination ) होता है। जिसका काम आपके डिवाइस और उनके VPN server  के बीच सुरक्षित और तेज़ कनेक्शन स्थापित करना होता है।

  • OpenVPN Protocol: यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला VPN protocol है। ओपन सोर्से ’(Open )होने के कारण यह सबसे सुरक्षित विकल्प है। ओपन-सोर्स होने का यह फायदा है कि इसका सोर्स-कोड किसी को भी वेरीफाई करने के लिए उपलब्ध होता है । इसलिए यदि कोई सिक्यूरिटी होल्स पाए भी गए तो वे डेवलपर्स कमुनिटी द्वारा सपोर्ट जल्द ही उपलब्ध कराया जाता है।
  • PPT Protocol: यह Point-to-Point Tunnelling Protocol के नाम से जाना जाता है| यह ज्यादातर फ्री वीपीएन सर्विस द्वारा उपयोग किया जाता है और बहुत कम सुरक्षित है। यह 1995 तक उपयोग किया जाता था परन्तु यह अब बिलकुल भी सिक्योर नहीं है, इसलिए इसका उपयोग ना करना ही बेहतर होगा|

आशा करता हूँ ये जानकारी आपको पसंद आई होगी, आपके विचार हमें कमेंट बॉक्स के जरिये

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